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योग गुरु बाबा रामदेव

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स्वामी रामदेव का संक्षिप्त परिचय :-               रामकृष्ण यादव भारतीय योग-गुरु हैं, जिन्हें अधिकांश लोग स्वामी रामदेव के नाम से जानते हैं। उन्होंने योगासन व प्राणायामयोग के क्षेत्र में योगदान दिया। रामदेव जगह-जगह स्वयं जाकर योग-शिविरों का आयोजन करते हैं, जिनमें प्राय: हर सम्प्रदाय के लोग आते हैं।  जन्म: 25 दिसंबर 1965 (आयु 54 वर्ष), महेंद्रगढ़ पूर्ण नाम: Ramkrishna Yadav ऊंचाई: 1.73 मी शिक्षा: गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय पालक: रामनिवास यादव, गुलाबो देवी बाबा रामदेव जी पतंजलि में कैसे आए :- 1 पतंजली आयुर्वेद की शुरुआत 1997 में बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने की थी। पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड का कॉर्पोरेट मुख्यालय हरिद्वार में है जो कि उत्तराखंड में गंगा नदी के तट पर स्थित है। 2 न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक साक्षात्कार में बाबा रामदेव ने कहा था कि एक स्वामी के रूप में भी पतंजलि का सार्वजनिक चेहरा वही थे। 3. इसी इंटरव्यू में रामदेव ने बताया था कि 1990 के दशक में एक गुरुकुल में पढ़ते वक़्त दो दोस्त मिले। दोनों किसान के बेटे...

3 दिन बाद कबीर प्रकट दिवस

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मीराबाई को शरण में लेना        मीरा बाई पहले श्री कृष्ण जी की पूजा करती थी। एक दिन संत रविदास जी तथा परमात्मा कबीर जी का सत्संग सुना तो पता चला कि श्री कृष्ण जी नाशवान हैं। समर्थ अविनाशी परमात्मा अन्य है। संत रविदास जी को गुरू बनाया। फिर अंत में कबीर जी को गुरू बनाया। तब मीरा बाई जी का सत्य भक्ति बीज का बोया गया। गरीब, मीरां बाई पद मिली, सतगुरु पीर कबीर।  देह छतां ल्यौ लीन है, पाया नहीं शरीर।।

5 जून कबीर साहेब प्रकट दिवस

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52 Cruelities On GodKabir        पंचगंगा घाट है जो काशी मे दशामेव घाट से 200 मीटर की दूरी पर है  कबीर साहिब ने शिशु  रूप बनाकर लीला की और उस समय के प्रसिद्ध ब्राह्मण स्वामी रामानंद जी को घाट  की सीढियों  पर मिले शिशु रूप मे   उठाया तो झूकते समय उनकी कंठी कबीर साहेब के गले में अपने आप पड़ गई तब से कबीर साहिब रामानंद को अपना गुरु कहने लगे लेकिन जव रामानंद जी ने जाना कि यह तो परमात्मा है और खुद परमात्मा आए हुए हैं तो रामानंद जी ने अपने 1400 ब्राह्मण शिष्यों को कहा कि कबीर साहिब ही पूर्ण परमात्मा है और सतगुरु जी हैं उनसे नाम दीक्षा ले और अपना कल्याण करवाएं कबीर साहिब ने अनेक लीलाएं रामानंद जी को दिखाइ और सतलोक दिखाया आंखों देखकर रामानंद जी ने पूर्णता कबीर साहेब जी के चरणों में अपना जीवन समर्पित कर दिया था। देखें साधना टीवी चैनल रात 7:30 बजे

खराब शिक्षा से संस्कारों का पतन

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भारतीय संस्कृति का पतन वर्तमान युग शिक्षा का युग है, इस युग में लौकिक शिक्षा तो बालक-बालिकाओं को शिक्षा संस्थायें एवम् सरकार से प्राप्त हो रही है, परंतु इनमें नेतिकता तथा भारतीय संस्कृति व संस्कार की शिक्षा देने वाले न के बराबर है, संस्कारों के पतन का स्तर तो दिन ब दिन नीचे गिरता ही जा रहा है, इसलिये बाल संस्कार शिक्षण शिविर का आयोजन होना चाहियें ताकी, बच्चों में धार्मिक संस्कार आये, संस्कारों से समाज की उन्नति होगी, और समाज का विषम वातारण समता में आकर बच्चों एवं बड़ों में सदाचार के संस्कार रोपित होंगे। बेहतर  शिक्षा  सभी के लिए जीवन में आगे बढ़ने और सफलता प्राप्त करने के लिए बहुत आवश्यक है। यह हममें आत्मविश्वास विकसित करने के साथ ही हमारे व्यक्तित्व निर्माण में भी सहायता करती है। स्कूली  शिक्षा  सभी के जीवन में महान भूमिका निभाती है। ...  शिक्षा  के सभी स्तर अपना एक विशेष  महत्व  और स्थान रखते हैं। आज के युग में कैसे परिवर्तन लाया जाए:-       आप लोग हैं जो फिल्मों को देख देख कर इतने पागल हो रहे हैं कि मानो आपका आधा संसार...

जैसे संस्कार वैसा जीवन

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 व्यक्ति की पहचान:-              कौन व्यक्ति कैसा है इसकी पहचान उसके रंगरूप जाति से नहीं, वरन उसके जीवनगत संस्कार से होती है। व्यक्ति के संस्कार ऊंचे हो तो छोटा होकर भी उच्च आदर्श को स्थापित कर जाएगा। यदि व्यक्ति संस्कार विहीन है तो उसके ऊंचे कुल में पैदा होकर भी कुलीनता पर व्यंग ही होगा। नजरिया बदलना होगा --  सही नजरिये के लोग चमड़ी के रंग व फैशन पर ध्यान नहीं देते वे सदा गुण और संस्कारों को ही महत्व देते हैं । व्यक्ति की पहचान करनी है तो उसके संस्कारों को जानो संस्कार व्यक्ति का सही मूल्यांकन करवाता है। संस्कार जीवन की नीव  है , जीवन की संस्कृति हैं यही व्यक्ति की मर्यादा और उसकी गरिमा है। संस्कारों ने व्यक्ति को सदा सुखी ही किया है । और जो संस्कारों को महत्व नहीं देता उसे अंततः पछताना ही पड़ता है । वर्तमान पारिवारिक समस्याएं:-             परिवारों की समस्याऐं किशोरों, युवाओं, प्रौढ़ों एवं महिलाओं से भी संबन्धित है। किशोर वर्ग के समक्ष आधुनिक शिक्षा एवं पाश्चात्य प्रभाव की समस्या है। प्रौढ़ों एवं ब...

दहेज एक कुप्रथा

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        दहेज समाज में एक सामाजिक अपराध है जो महिलाओं पर कल्पना से परे प्रताड़नाओं तथा अपराधों का कारण है। इस अपराध ने समाज के सभी तबकों में महिलाओं की जानें ली है – चाहे वे गरीब हों, मध्यम वर्ग की या धनाढ्य। लेकिन गरीब व मध्यम वर्ग के व्यक्ति इसके जाल में सबसे ज़्यादा फंसते हैं एवं शिकार होते हैं, जिसका मुख्य कारण है जागरूकता तथा शिक्षा का अभाव। यह दहेज प्रथा की वज़ह से ही है कि पुत्रियों को पुत्रों जितना महत्व नहीं दिया जाता। समाज में, कई बार यह देखा गया है कि उन्हें बोझ समझा जाता है तथा उन्हें अक्सर हीन समझा जाता है एवं द्वितीय श्रेणी का दर्ज़ा दिया जाता है, चाहे वह शिक्षा हो या अन्य सुविधाएं। यह हम सबको जानना चाहिए कि पहले हम अपनी पुत्रियों का मूल्य समझें, ताकि जब वे बड़‍ी हों तो अन्य लोग भी उनका मूल्य समझें। संत रामपाल जी महाराज ने किया दहेज का खात्मा :-               जी हाँ, सुनकर और जानकर हैरानी होगी आपको कि जिस संत को हमारी सरकारें जेल में बंद करके  अपनी साजिशों पर पर्दा डाल रही है तथा युवाओं के भविष्य को सवारने के ...

कैंसर का इलाज अध्यात्म से

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क्या आप दूर दूर तक के अस्पताल में जा चुके हैं ? 🤔 क्या आपको अभी तक कैंसर की बीमारी का इलाज नही मिला ? 🤔 👉 तो घबराने की जरूरत नही आप बिल्कुल ठीक हो सकते हैं वो भी फ्री में बस आपको सत भक्ति करनी होगी ! दुनिया भर में कहीं भी कोई कैंसर या अन्य किसी भी बीमारी का मरीज हो संत रामपाल जी महाराज की शरण मे ले कर आये मरीज को बीमारी से मुक्ति दिलाकर पुण्य कमायें। कैंसर आज दिन व दिन लोगों में बढ़ता जा रहा है और विज्ञान ने भी अपने हाथ खड़े कर लिए है कि हमारे पास कैंसर जैसी लाइलाज बीमारी का कोई इलाज नही है! लेकिन आज समाज को इतना सोचने🤔 की जरुरत नही है क्योंकि इस धरती पर भगवान आ चुके जो अपने अध्यात्म ज्ञान से पूरे विश्व को रोग रहित करेगा और तो ओर समाज मे फैली हुई कुरीतियों को जड़ से मिटायेगा 🙏 ओर  वो महान संत है👇 जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जो पूरे विश्व मे सभी को सुखी जीवन प्रदान करेगा केवल अपनी सत्य भक्ति देकर👇  🙏संत रामपाल जी महाराज जी  से निःशुल्क नाम दीक्षा लेकर उनके बताए हुए मर्यादावत में भक्ति करें और फिर देखें कि वास्तव में भगवान आ चुके है जो हमेे रोग म...